Thursday, May 7, 2020

तम्बाकू सेवन करना महापाप हैं ।

तम्बाकू सेवन नहीं करना चाहिए ।
तम्बाकू का किसी भी रूप में सेवन करना हानिकारक हैं । इससे शरीर का नाश होता हैं । 
मानव शरीर को ऑक्सीजन की आवश्यकता है। उसके स्थान पर तम्बाकू का धुँआ (कार्बनडाईऑक्साइड) प्रवेश
करता है तो उनको खाँसी रोग हो जाता है। पित्त तथा बाई (बाय) का रोग हो जाता है।

तमा + खू = तमाखू
खू नाम खून का तमा नाम गाय। 
सौ बार सौगंध इसे न पीयें-खाय।।

 फारसी भाषा में ‘‘तमा’’ गाय को कहते हैं। खू = खून यानि रक्त को कहते हैं। यह तमाखू गाय के रक्त से उपजा है। इसके ऊपर गाय के बाल जैसे रूंग (रोम) जैसे होते हैं। हे मानव! तेरे को सौ बार सौगंध है कि इस तमाखू का सेवन किसी रूप में भी मत कर। तमाखू का सेवन गाय का खून पीने के समान पाप लगता है।
ऐसे महापाप कभी नहीं करना चाहिए । ऐसी बुरी वस्तु को आज ही छोड़े । 
 अगर आप तम्बाकू छोड़ना चाहते हैं और छोड़ नहीं पा रहे हैं तो आप संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर सत भक्ति करे । संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर सत भक्ति करने वाले लाखों लोगों का नशा छूट गया और वे सुखी व निर्मल जीवन जी रहे हैं ।

अवश्य देखें प्रतिदिन 👉 साधना टीवी 7:30 PM
संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के लिए 👉 फॉर्म भरे ।

Wednesday, May 6, 2020

शराब नाश करती हैं ।


शराब का सेवन बहुत हानिकारक हैं ।
  🍷🍾🍾❌❌🚭
नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश करता है।
शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं फेफड़े, लीवर, गुर्दे, हृदय। शराब सबसे प्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है।
शराबी व्यक्ति का शरीर रोगों की खान बन जाता है। जिस कारण उनके परिवार को उनके नशे और बीमारियों पर खर्च के कारण दोहरी मार पड़ती है।

शराबी व्यक्ति विचार करें.......
   आज किसी की भी संतान उस समय बहुत गर्व महसूस करती है जब उसे अपने स्वावलंबी पिता का परिचय देना हो।शराबी परिजन का परिचय देने में बच्चे हीन भावना का शिकार होते हैं।

 शराब गृह क्लेश को जन्म देती है व आर्थिक, शारीरिक, सामाजिक बदहाली अपने साथ लेकर आती है।

परमात्मा कबीर साहेब जी अपनी अमर वाणी में कहते हैं
           मदिरा(शराब) पीवे कड़वा पानी ।
              सत्तर जन्म कुत्ते के जानी।।
शराब पीने🍷 से 70 जन्म तक कुत्ता🐕 बनने की सजा मिलेगी। ये खुद परमात्मा ने बताया है।

संत गरीबदास जी महाराज कहते हैं :-
   सुरापान मद्य मांसाहारी, गवन करे भोगे पर नारी।
  सत्तर जन्म कटत हैं शीशम, साक्षी साहिब हैं जगदीशम।।


सुरापान व मांस आदि खाने का अंजाम जब इतना बुरा है तो इससे त्यागने में ही भलाई है।
        आज ही त्यागें ऐसी बुरी वस्तु को ।
 
यदि आप शराब छोड़ना चाहते हैं और छोड़ नहीं पा रहे तो सतभक्ति से शराब छूट सकती है।
     आज संत रामपाल जी से उपदेश लेकर बहुत लोग शराब छोड़ चुके हैं और उनके परिवार में खुशहाली आई है।

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तम्बाकू सेवन करना महापाप हैं ।

तम्बाकू सेवन नहीं करना चाहिए । तम्बाकू का किसी भी रूप में सेवन करना हानिकारक हैं । इससे शरीर का नाश होता हैं ।  मानव शरीर को ऑक्...